पार कर आएं हैं
पार कर आएं हैं
कितना लंबा रास्ता था ।
दर्द से वास्ता था।
कितने उतार-चढ़ाव से,
भरी थी जिंदगी ।
सपाट समतल कहाँ,
खुरदुरी थी जिंदगी।
खत्म ही नहीं होती थी हद।
लेकिन बढ़ जाने की थी ज़िद।
धूप-छाँव की तरह ,
सुख-दुख आते जाते रहे।
दुख के बाद ही सुख,
मेहरबान लगता है।
मुश्किलों से ही जीना,
आसान लगता है।
पिताजी ने यही बात कही थी,
पर तब समझ से परे थी।
अनुभवों से सबक सीखा है,
जो खट्टा है, मीठा है, फीका है।
अतीत को मिटा आएं हैं,
खुद को आज में ले आएं हैं।
लंबा रास्ता पार कर आएं है।
