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डॉअमृता शुक्ला

Others

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डॉअमृता शुक्ला

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गुलदस्ता

गुलदस्ता

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-नन्हें बच्चो तुम्हें पालना है

एक सुरक्षित घोंसला तानना है।
ऊंचाई में उड़कर दाना लाना है
कठिनाई का करना सामना है
जब पंख आ जाएँगे तुम्हारे
तब तुम उड़कर जाओगे किनारे 
मैं यहाँ अकेली रह जाऊँगी
तुम्हारा रास्ता देख पाऊँगी
डॉअमृता शुक्ला
रायपुर छत्तीसगढ 
 

2-माँ मत रोओ, मैं तेरे आँसू पोंछ देता हूँ।
बना रहूँगा संग तेरे,मैं तेरा अच्छा बेटा हूँ।
अभी समय ठीक नहीं ,ये जरूर बदलेगा,
ज्यादा समझ नहीं है,बस इतना कहता हूँ।
डॉअमृता शुक्ला
रायपुर छत्तीसगढ 

3_मन

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पता नहीं, 

मन क्या चाहता है? 

शोर से बेचैन होता , 

अकेलेपन से घबराता है। 

तुम्हारा हूं सदा ये जताता है।

फिर कहीं गुम हो जाता है। 

ढूंढती हूं जो कहीं उसे, 

यादों के अबांर में नज़र आता है। 

नियति होती है मिलना बिछड़ना, 

कुछ देर में मुझसे मिल पाता है। 

डॉअमृता शुक्ला

रायपुर छत्तीसगढ 



4_तुमसे दुनिया है मेरी तुमसे आंखों में सपने

कोई साथ रहे न रहे तुम सदा रहना अपने

डॉअमृता शुक्ला

रायपुर छत्तीसगढ 


5_सामने तुम्हारा चेहरा  है हमारे बीच मौन पसरा है

जाने कितनी देर से ऐसे ही बिना संवाद के वक्त ठहरा है।

डॉअमृता शुक्ला

रायपुर छत्तीसगढ 



6_दोस्ती
जो दूर तक साथ निभाए वो दोस्त है। 
मन की बात समझ पाए वो दोस्त  है।
वक्त के रेले में बिछड़ जो दोस्ती टूटे, 
उसको  ढूंढ कर ले लाए वो दोस्त है।
डॉअमृता शुक्ला
रायपुर छत्तीसगढ 

7_दोस्तों से रिश्ता इसलिए निभता है।
जब दोनों ओर से फासला घटता है।
जब एक चलकर दूसरे तक पहुँचता ,
दूसरे को भी वहाँ तक चलना पड़ता है।
डॉअमृता शुक्ला
रायपुर छत्तीसगढ 
 
8_मुमकिन हो जाएगा

ज्योतिष, हाथ की रेखाएं,

रत्न, सोने - चांदी की मालाएं ,
 अंगूठियां और कितने टोटके ,
आगे जाने से क्यों हैं रोकते।
कभी मन में ये विचार किया है ,
अपनों की कही बात का सार गहा है।
ईश्वर पर हो आस्था , करो बडों का आदर ,
इच्छाएं पूरी होंगी बिछा दो प्यार की चादर।
सच यही है कि जीवन सफलतम होगा,
उन्नति की शिखर पर हर एक कदम होगा ।
नसीब से मिलतीं हैं आशीर्वाद और दुआ
मुमकिन हो जाएगा सब, जो अब न हुआ।
डॉअमृता शुक्ला
रायपुर छत्तीसगढ 



9_बचपन से शुरू हुआ था एक सफर।

जवानी आई सवार होकर सपनों पर।

बुढापे की निशानियाँ उभर गई अब तो,

आईना बताता ,कैसे बीती इतनी उमर

डॉअमृता शुक्ला

रायपुर छत्तीसगढ 


10_उम्र बढ़ती जाती  है ,नींद घटती है,

फिर जीने की चाहत सिमटती है।

नज़र धुँधला रही,सांस कुम्हला रही,

ज॔रा सी आहट, हो तो  खटकती है।

आज में जीते कल की चिंता बनी

अतीत की यादें पास में भटकती हैं।

डॉअमृता शुक्ला

रायपुर छत्तीसगढ 




11_-क्या मांगें हम प्रभु तुमसे। 
आशा के दीपक बुझते। 
हम तो सदा  सहारे तेरे। 
फिर मत रहियो आंखें फेरे। 

जग में जो जैसा करता है, 
फल उसको वैसा मिलता है। 
जीवन में नेक काम करो तो, 
शांति भक्ति से मन रचता है। 
पूजन अर्पन करें सवेरे। 
फिर मत रहियो आंखें फेरे। 

जब तक सासें चलती रहतीं, 
तब तक माया फूले फलतीं। 
क्षमा मांगते नित्य प्रति हम, 
हो जाए यदि कोई गलती। 
तुम दाता हम याचक ठहरे। 
फिर मत रहियो आंखें फेरे। 
डॉअमृता शुक्ला 
रायपुर छत्तीसगढ 



12_प्यार बांटकर ही प्यार निभाना है। 

आंखों से आंसुओं.को हटाना है। 


दूर हो जाओ तो याद आते रहो

भूल जाने का  नहीं ज़माना है। 


कब तक दिल में बात रख्खोगे। 

किसी से तो सच बताना है।


इस तरह तन्हा मत फिरा करो

ढूंढ लो मिल जाए जो ठिकाना है।


लोग अपनी अपनी तरह सोचेंगे

यह हकीकत है या ये फ़साना है।

डॉअमृता शुक्ला

रायपुर छत्तीसगढ 



13_घर के हर कोने में बस खामोशी है छाई सी।
 डर है मैं कहीं तस्वीर न बन जाऊं तन्हाई की।
आने वाले से न पूछो जाने का अंदाज है क्या,
आने-जाने की ये बातें होती हैं परछाईं सी।
आंखों से आंसू न पोंछों,इनको यूं बह जाने दो,
अपनों की दी तकलीफों से मैंने यही कमाई की।
 छोटी सी बातों पर जिसने हमसे रिश्ता तोड़ा
उसके सपनों की बस्ती हमने  कभी बसाई थी  
बरगद की  छांव छिन गई  जिसपे हम इतराते थे,
 अब वो ठंड़क नहीं ,जो  हमने बरसों पाई थी।
सांसों का चलना  ही जीवन का सारांश नहीं 
 पता भी न चल पाएगा मौत जब लेने आएगी। 

डॉअमृता शुक्ला 
रायपुर छत्तीसगढ 


घर
***
प्रेम और विश्वास नींव में,मर्यादा की हो दीवार, 
आदर्शों की छत के नीचे झेल सके जीवन के वार।
सच्चाई की सरगम पर,अपनेपन का गीत बजे,
निष्ठावान रहे जीवन में,दुल्हन जैसी प्रीत सजे।
शक का द्वार बंद रहने दें,सबको मन की कहने दें,
जब तक सीमा के अंदर हो,थोडी़ मन की करने दें।
केवल रिश्ता ही जुड जाना,है घर की आधार नहीं,
बनता मकान ईंट गारे से,होता घर का निर्माण नहीं।
घर मकान का फर्क जानना वालों का संसार हुआ,
वही हुआ सार्थक समर्थ जिसका सच्चा घर-द्वार हुआ।
डॉअमृता शुक्ला
रायपुर छत्तीसगढ 


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