STORYMIRROR

Chinmaya Kumar Nayak

Abstract Others

4  

Chinmaya Kumar Nayak

Abstract Others

पापा

पापा

1 min
551

अपनी हर इच्छाओं को त्याग कर

अपनी हर सपनों को तोड़ कर

वो उनकी हिस्से की हंसी हमें सौंप देते हैं 

पापा खुद के लिए नहीं, हमारे लिए जीते हैं।


आदर्श और विचारों की पाठ पढ़ाकर

हमें डट के जीने की नुस्खे बताकर

वो अपने आंसुओं को आँखों में ही दबा लेते हैं

पापा खुद के लिए नहीं, हमारे लिए जीते हैं।


हमें लायक बनाकर एक छोटी उम्मीद से

दूर नहीं करेंगे खुद से उनकी ढलती उम्र से

बड़े होते ही क्यों हम इतनी खुदगर्ज बन जाते हैं

पापा खुद के लिए नहीं, हमारे लिए जीते हैं।


अपनी कन्धों से हमारी बोझ उठाकर

हमारी हार जीत में हमें संभाल कर

वो हमारे अन्दर शायद खुद जी लेते हैं

पापा खुद के लिए नहीं, हमारे लिए जीते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract