गुणों की खान है..
गुणों की खान है..
पापा तो बस पापा हैं
किसी के हैं नहीं, और किसी के साथ हैं
बस इतना जरूर हैं कि,
कोई उनसे दूर हैं तो कोई पापा के पास हैं ,
पापा तो बस पापा हैं ,
पापा क्या हैं ,
वो गुणों की खान हैं ,
आपके वजूद की पहचान हैं ,
आपका अभिमान हैं ,
परिवार का स्वाभिमान हैं ,
आपका का अधिकार हैं ,
मन में छुपा एक प्यार हैं ,
पापा कभी बताते नहीं हैं ,
न वो कभी जताते हैं ,
भले ही बच्चे कितना सताते हैं ,
लेकिन, अपना फर्ज निभाते हैं ,
जो बेटा पापा को जान जाता हैं ,
उनकी बातों की गहराईयों को पहचान जाता हैं ,
यह मान लेना राही, वो ही बेटा,
समाज में बहुत सम्मान पाता हैं ,
पापा तो बस पापा हैं ,
किसी के हैं नहीं, और किसी के साथ हैं ,
पापा की बातों का क्या कहना,
बच्चों को उनसे क्या लेना देना,
बात बस इतनी हैं ,
पापा जो कहे उसे सहते रहना,
क्योंकि,
पापा की सोच अपार होती हैं ,
उस डांट में भविष्य की बयार होती हैं ,
उनका मोल तो तब समझ में आएगा,
जब पापा का साथ छूट जाएगा,
उनकी बात व डांट को सहते रहोगें,
अपनी सफलता की कहानी में,
पापा का जिक्र करते रहोगें,
भले ही दुनिया सफलता के पीछे,
किसी का भी हाथ बताती रहे,
हकीकत तो यह हैं कि,
यदि पापा ने पौधा नहीं सींचा तो,
बेटा मजबूत पेड़ नहीं बन सकता,
पापा तो बस पापा हैं ,
किसी के हैं नहीं, और किसी के साथ हैं.
