STORYMIRROR

AKIB JAVED

Romance

4  

AKIB JAVED

Romance

नज़्म

नज़्म

1 min
389

अपनी गलती को ढकने की कोशिश की

नज़रों से सब की छिपने की कोशिश की।


चाँद भी जब यूँ चाँदनी में खो गया

मैंने तब तारे गिनने की कोशिश की।


वक्त के सिरहाने से सब कुछ खो गया 

हमने ज़िन्दगी को तपने की कोशिश की।


ख़्वाबो में हमको देखकर वो ऐसे इतराए

वो हमको नज़रो से ठगने के कोशिश की।


धड़कन जो धड़कती रही दिल में धक धक

सिर्फ़ चाहतो को लिखने की कोशिश की।


इक हवा का झोख़ा आया मेरे सफ़ीने में

हमने भी हवा से लड़ने की कोशिश की।


लख्ते ज़िगर मेरा, मेरा शरमाया भी वो

वो दिल में बसकर डसने की कोशिश की।


सारी उम्र गुज़ारी आकिब" वजूद ढूढ़ता रहा

सच इश्क की राह में चलने की कोशिश की।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance