STORYMIRROR

jyoti pal

Abstract

4  

jyoti pal

Abstract

नवीन कली सी

नवीन कली सी

1 min
232


शाखाओं पर

नवीन कली सी हो तुम

खिलखिलाती हो फूलों की तरह

तुम चांद नहीं

पर चांद से भी खूबसूरत हों तुम

नवीन कली सी हो तुम!


महकते हैं रास्ते भी 

आगमन में फूल बिछ जाते हैं

चलती हैं पवन सुगन्धित

पल्लव भी गीत गाते हैं

जहाँ से गुजरती हो तुम,

नवीन कली सी हो तुम!


प्रकृति की गोद में

बसा जो मंदिर

उसी मंदिर की मूरत सी तुम,

सुबह की पहली किरण

सबकी लाडली हो तुम

नवीन कली सी हो तुम!


भोली सी सूरत

ममता की मूरत

बहुत उदार हो तुम

लगता है जमीन पर

स्वर्ग से उतरी परी हो तुम

नवीन कली सी हो तुम!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract