नव वर्ष और नव जीवन
नव वर्ष और नव जीवन
सोचा था इस बार छुट्टियां लगते ही कहीं घूमने चलेंगे । बहुत दिनों से निकलना नहीं हो पा रहा था कभी त्योहार तो कभी बच्चों की परीक्षा। इस बार हम सबने निश्चय कर लिया कि जाना ही हैं । नव वर्ष की प्रात: बेला में जाने की उत्सुकता में जल्दी- जल्दी काम समेटे जा रहे थे। हॉस्पिटल स्टॉफ को भी कह दिया था कि एक जनवरी को अवकाश रखेंगे।
बच्चे भी तैयार हो रहे थे और उत्सुक थे क्योंकि कुछ दिनों बाद फिर फाइनल परीक्षा शुरू होने वाली थी और इसके चलते फिर निकलना संभव नहीं था।
अचानक से स्टॉफ मेंबर का फोन आया कि एक इमरजेंसी है । अब तो कुछ सोचने का सवाल ही नहीं था । तुरंत हम दोनों घर से हॉस्पिटल निकले । वहाँ पहुँच कर सारी बात जानी और महिला मरीज़ की सारी रिपोर्ट्स और स्थिति देखी। थोड़ी सी भी देर खतरा बन सकती थी , तुरंत ऑपरेशन के लिए सारी तैयारी की गई और कुछ भी हो सकता हैं कि आशंका से बाहर आने का प्रयास किया गया।
काफ़ी मशक्कत के बाद ऑपरेशन सफ़ल रहा और जच्चा- बच्चा दोनों को बचा लिया गया । कुछ आवश्यक हिदायतों के साथ यह खुशखबरी बाहर परिजनों को दे दी गई थी। अब तक वो सब भी रेफर की उलझन से मुक्त हो चुके थे
हमने मोबाइल में समय देखा तो दोपहर के चार बज चुके थे । घर पहुँच कर बच्चों को सारी बात बताई और कहा कि अब फिलहाल तो जाना संभव नहीं हैं लेकिन हाँ पक्का शाम को यहीं कहीं घूमने चलेंगे और डिनर भी बाहर।
बच्चों के चेहरे पर कुछ राहत दिखाई दी तो हम भी आश्वस्त हो गए और मन ही मन बाद के लिए प्लान स्थगित कर दिया।
कहीं बार होता हैं ऐसा कि कुछ प्लान बनता है मगर दूसरों के जीवन की रक्षा करना अपना परम कर्त्तव्य मानकर बाकी सब चीजें कुछ देर के लिए एक तरफ़ छोड़ दी जाती है।
शाम को सबके साथ एक बार फिर शहर की सड़कों पर नव वर्ष की रौनक और जगमगाहट का आनंद लिया गया।
©® मोहिनी गुप्ता राजगढ़ मध्य प्रदेश
