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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

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नव विहान का संदेश लाया हरकारा

नव विहान का संदेश लाया हरकारा

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बाल अरुण ने जब आँखें खोली,

फैल गया तब चहूँ ओर उजियारा !


नीड़ त्याग कर निकले सारे पाखी,

पुलक कर उठ गया है जग सारा !


कलरव करने लगे सभी मिल कर ,

शीतल मंद मंद समीर भी बह चला !


हुई निराशा हताशा दूर सभी की,

मन में नूतन उमंग उल्लास अब पला !


प्रखर विशिख जब दिनकर ने छोड़े,

दुम दबा कर भाग चला तब अँधियारा !


लगी ऋचाएँ पढ़ने प्राची की सारी दिशाएं ,

पश्चिम में जय - गान आरम्भ हुआ निराला !


नवयुग का संदेशा सबको, सुना रहा है हरकारा,

दसों दिशाओं में स्वर गूँजा, लो देखो अब तम हारा !


स्वर्णिम रथ पर आरूढ़ रवि ने, रश्मि-कलश छलकाया,

जय-जय का उद्घोष हुआ, जन-जन का मन हुलसाया !



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