STORYMIRROR

Rekha Verma

Children

4  

Rekha Verma

Children

नटखट बंदर

नटखट बंदर

1 min
444

नटखट बंदर मस्त कंलन्दर

चुपके से आया घर के अंदर

अपनी शेतानी मे था धुरन्दर

एक नजर उसने घर पर डाली

देखी उसने रसोई हमारी

झटपट उसने कुण्डी खोली

पलभर मे किचन खंगाली

दिखा था उसको फ्रिज हमारा


जिस मे भरी थी रसमलाई

और मीठी सी जलेबी गदराई

उसको खाकर पेट की भूख मिटाई

और शरारत की अक्ल दौड़ाई


कुदते फादते फुलवारी आ पहुँचा

जिस मे सजे थे पुष्प हमारे

सुन्दर सुन्दर फुल हमारे

कुछ को खाया कुछ को नोचा


पुष्प वाटिका मे आतंक मचाया

कुछ को तोडा कुछ को फोड़ा

छत पर रखे कपडो को ना छोड़ा

शौर शराबा सुन पापाजी आये


लकड़ी से उसे मार भगाये

फिर कभी ना वो बंदर आया

जान बचाकर जिन्दगी पाया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Children