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Nandita Srivastava

Abstract

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Nandita Srivastava

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नमामि गंगे

नमामि गंगे

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नमामि गंगे नमामि गंगे

पाप हारिणी,जगत तारिणी

कल कल हर हर बहती जाये

नमामि गंगे.........


जिस दिशा में तू बह जाती

उस दिशा को पावन करती


बाँह पसारे पाप समेटे

कल कल हर हर तू बह जाती

नमामि गंगे............

हे जगत तारिणी,जग कल्याणी

तुझे प्रणाम ...........

हेभगीरथी तुझे प्रणाम

शत शत तुझे प्रणाम

नमामि गंगे......।



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