नज़रिया
नज़रिया
कोई अनदेखा करे, उसे क्या देखना!
देखने को प्रकृति ने कितना कुछ बनाया है।
सूरज की पहली किरण का जादू देखो,
हर रंग में जीवन का गीत गुनगुनाया है।
दिल दुखाने वालों से, दिल लगाने से क्या फायदा!
दिल लगाने को क्या कोई सुंदर फूल नहीं खिलाया है?
हर पत्ता, हर कली, हर शाख की मुस्कान देखो,
हर मौसम ने प्यार का संदेश सुनाया है।
जो अपने नहीं, उनके पीछे क्यों भागना?
खुद को भूलकर उन्हें क्यों अपनाना?
आकाश की विशालता में अपना मन रखो,
हर तारे ने तुम्हें संग रहने बुलाया है।
जो समझ न सके तुम्हारी बातों की मिठास,
उन्हें छोड़ो, जीवन का करो कुछ खास।
नदी के बहाव में नई राह तलाशो,
हर मोड़ ने जीवन का सबक सिखाया है।
तो चलो, प्रकृति की गहराइयों को देखो,
हर पल में जीवन के रहस्य को समझो।
जो अनदेखा करे, उसे क्या देखना!
प्रकृति ने तुम्हारे लिए स्वर्ग रचाया है।
