STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Fantasy

4  

Minal Aggarwal

Fantasy

नीला रंग

नीला रंग

1 min
336

आसमान का 

नीला रंग

समुंदर का भी 

नीला रंग

एक मेरे शीर्ष पर विराजमान 

दूसरा मेरे पैरों तले 

एक की ऊंचाई नापनी

मुश्किल तो 

दूसरे की गहराई 

आसमान में पंछी उड़े तो 

समुंदर में मछली तैरती हुई 

अपने पंख फैलाकर चले 

मैं अपनी छत से उड़ा लूं

खुले आसमान में पतंग तो 

मैं चला लूं एक छोटी नौका भी 

एक विशाल समुंदर में 

आसमान के सीने के धरातल को 

चीरता एक सूरज रोज सुबह उगे तो

इस आसमान को एक विरह का 

विदाई गीत सुनाता सूरज 

रोज शाम समुंदर के तल में डूबे 

आसमान में रात को 

इसकी काली चादर पर टंके दिखते 

ढेर सारे जुगनुओं से टिमटिमाते 

सितारे 

एक चांद कभी पूरा 

कभी अधूरा 

किसी सुंदर स्त्री के मुखड़े सा

ही

यह चांद का टुकड़ा 

एक हवाई जहाज भी जाता 

दिख जाता 

किसी अंजान दिशा में 

एक जलते बुझते बल्ब सा 

समुंदर की लहरें भी 

कभी शांत तो

कभी शोर करके 

झिलमिलाती सी लहराती

रात के एक सुंदर चमकीले 

आसमान के तले 

नीला रंग 

आसमान का 

समुंदर का 

मुझे भगवान श्री कृष्ण की 

याद भी दिलाता 

उनकी स्तुति भी 

करवाता 

उनके होने का आभास भी 

कराता 

नीले रंग के जल सा

पारदर्शी प्रभु का प्रेम 

मेरे प्रति 

मुझे मेरे पवित्र, पावन और 

सौम्य होने का अहसास भी 

कराता 

नीला रंग 

सिर से लेकर पांव तक 

एक जादुई शामियाने सा 

मुझे एक सुंदर जीवात्मा होने का 

आशीर्वाद भी दे जाता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy