STORYMIRROR

Poonam Mishra

Abstract

3  

Poonam Mishra

Abstract

निगोड़ी पायल

निगोड़ी पायल

1 min
222


मेरे मन को समझे है,

जुबां से बोला ना कुछ,

ये निगोडी पायल ...

घुंघरुओं में बोल पड़ी....

दबे-दबे से पांव चली ,

मन ही मन मुस्कुराती ,

हौले से कानों में कुछ कहना था,

लेकिन ये निगोडी पायल ...

घुंघरुओं में छन्न से बोली

पायल की रूनझुन,

भंवरों की गुनगुन,

खयालों मे खोई,

कुछ दबे- दबे से एहसास मेरे,

इस निगोडी पायल के...

घुंघरूओं में बज उठी

ओ निगोडी पायल,

अब ना यूं शोर कर,

ना किल्लोल कोई,

रात्रि का प्रहर है,

सो रहा शहर है,

लेकिन निगोडी पायल,

घुंघरुओं में जाग पड़ी.....!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract