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Poonam Mishra

Abstract

3  

Poonam Mishra

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निगोड़ी पायल

निगोड़ी पायल

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मेरे मन को समझे है,

जुबां से बोला ना कुछ,

ये निगोडी पायल ...

घुंघरुओं में बोल पड़ी....

दबे-दबे से पांव चली ,

मन ही मन मुस्कुराती ,

हौले से कानों में कुछ कहना था,

लेकिन ये निगोडी पायल ...

घुंघरुओं में छन्न से बोली

पायल की रूनझुन,

भंवरों की गुनगुन,

खयालों मे खोई,

कुछ दबे- दबे से एहसास मेरे,

इस निगोडी पायल के...

घुंघरूओं में बज उठी

ओ निगोडी पायल,

अब ना यूं शोर कर,

ना किल्लोल कोई,

रात्रि का प्रहर है,

सो रहा शहर है,

लेकिन निगोडी पायल,

घुंघरुओं में जाग पड़ी.....!



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