STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama

नेग

नेग

1 min
302

शुभ काम मे वो काम आता है

बिना बोले ही सौगात पाता है

नाम है इसका नेग,


हर जगह ये तो खुश्बू फैलाता है

थोड़ी नोकझोंक,थोड़ी हंसी

हर वक्त लबो पर हंसी लाता है


बड़ा काम का है ये नेग,

पैसे तो सिर्फ़ बहाना है

ये पैसे से नही,

प्यार से खरीदा जाता है


वो खुदा भी 

हम इंसानों को न जाने,

हर खुशी, हर गम में,

ये नेग ही नेक कहलाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama