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V. Aaradhyaa

Classics Inspirational

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V. Aaradhyaa

Classics Inspirational

नौनिहाल पर गर्व है

नौनिहाल पर गर्व है

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मानवीय रिश्ते बहुत महान नित नवण प्रणाम।।

आज वैशाख बदी अष्टमी विक्रमी संवत् 2081शुक्रवार तदनुसार 


नौनिहाल पर हम गर्व करते,

सगर्व जीने का है मौका देते।

उन्हीं को ही संतान कहते हैं,

वो मात-पिता संतुष्ट रहते हैं।।


जीवन भर हर संकट वक्त में,

कंधे से कंधा मिला रहे संग है।

भरत-लक्ष्मण समान जो चले, 

कहै उसे 'भाई' जीवन अंग है।।


सुख दुःख और भूख प्यास में,

भागीदार निर्धनता में आस है।

तंगी में भी निभाती जो साथ,

वह 'अर्धांगिनी' का विश्वास है।।


कम-ज्यादा नित संतोषी रहै,

न दुखी होवै न कुछ भी कहै।

रहै माँ-बाप, परिवार में ख़ुश, 

उसको सब 'बहन, बेटी' कहै।।


चाहे जितने मतभेद हो जाए,

तोभी संग  विवाद सुलझाए।

झगड़ा समाप्त कर, सुधार दे, 

वही जगत में 'कुटुम्ब' कहाये।।


कोई भी जब संकट आ जाये,

ऐसी घड़ी में जो साथ निभाये।

बिगड़ी को जो बनाकर दिखाए,

वही तो सही 'सम्बन्धी' कहाये।।


जो कहाता नित एक वटवृक्ष है,

बाहर से संकट हरण में दक्ष है।

अंदर ही अंदर पांव न खींचकर,

एक साथ रहे 'समाज' प्रत्यक्ष है।।

Q

विपत्ति में जो रहे नित साथ है,

मुसीबत रखता हल का हाथ है।

निस्वार्थ हैं जो कल्याणकारी कर्मी,

मित्र कहाये कर्म नित परमार्थ है।।


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