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BHAVANA AHUJA

Abstract

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BHAVANA AHUJA

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नारी सम्मान

नारी सम्मान

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नारी सम्मान एक ऐसा शब्द, जिसे बार-बार प्रताड़ित किया,

छील के सीना उसका, उसे सहने पर मजबूर किया!!


आज जो सच्चाई से आंखें चुराते हैं , ये वही वहशी दरिंदे हैं,

जो अपनी माँ-बहनो के नाम आते ही, जख्मी शेरो से गुर्राते हैं!!


मजबूर है वो, लाचार है वो, अभी शक्ति ने खुद को पहचाना नहीं,

कोमल है वो, कमज़ोर नहीं, ये राज़ उसने अभी जाना नहीं!!


प्रगति के पथ पर आगे बढो, ये नींव तुम्हें ही रखनी है,

इतिहास के इन पन्नो की शुरुआत तुम्हें ही करनी है!!


अंधकार में ठोकर खाने से कब पत्थर पारस बन जाता हैं,

परमेश्वर की अनमोल रचना को खुद सोने सा निखरना हैं!!


उजली भोर की किरणों सी, धरती का अभिमान बनो,

नवनिर्माण करो इस जग का, और ज्वाला सी धधकती निर्भया बनो!!


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