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shilpa kumawat

Classics Thriller

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shilpa kumawat

Classics Thriller

नारी शक्ति हो अब जागृत

नारी शक्ति हो अब जागृत

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बार - बार मन यही चाहता,

नारी शक्ति हो अब जागृत॥

कन्या पत्नी भगिनी माता,

इस समाज की भाग्य विधाता,

स्फूर्तिदायक संस्कारी रथ॥

 नारी शक्ति हो........... ॥१॥


अर्धशक्ति है जो समाज की,

शक्तिहीन क्यों समझे उसको,

नहीं जीयेगी चरित कलंकित।।

नारी शक्ति हो........... ॥२


इतिहासो से लिए प्रेरणा,

देश कार्य हितचरित बना ले,

मातृ - तेज को करने विकसित ॥ 

 नारी शक्ति हो........... ॥३


अपनी अस्मिता हम ना भूले,

कटंक पथ पर पग ना फिसले,

मोह जाल की बेले तोड़ ॥

 नारी शक्ति हो........॥४॥ 


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