न सुस्ती न लापरवाही
न सुस्ती न लापरवाही
कभी किसी भी समस्या से मत घबराएं,
लेकिन कभी भी मानें हम उसे न छोटा
जरा सी सुस्ती या लापरवाही के चक्कर में,
हमें भोगना पड़ सकता है घाटा बढ़ा ही मोटा
कितनी ही श्रेष्ठ योजना हो,
चाहे कितनी ही अच्छी हो तैयारी
सब गुड़ गोबर भी हो सकता है,
लापरवाही- सुस्ती पड़ेगी अति भारी
हर समस्या के मूल में जाकर ,
उसके हर जोखिम को हम जानें
सीख पुराने अनुभवों से लेकर,
नवज्ञान नवयुग के हल हम मानें
बदलते हैं तरीके वक्त के संग-संग ,
बदलती नयी तकनीक हम पहचानें
हर निर्णय त्वरित लें -सावधान रह,
हर एक क्षण परिवर्तन को हम जानें
होता बचाव सदा उपचार से बेहतर,
है सही सदियों से ही ये बात पुरानी
कभी समझें निर्बल न किसी रिपु को,
तब हो पाएगी खत्म कोरोना की कहानी।
