G.S. Pachouri
Romance
आज भी उनसे नहीं मिल पाया
बरसात ने उल्टे पांव लौटाया
कोशिश करूंगा हर रोज
एकदिन मुलाकात होगी
बेजोड़
काश !
बे मौसम बरसात
सहीदो को नमन
बेचारा आदमी
मित्र
मां
आशा
कर्तव्य जुनून...
छोटी मालकिन
मुलाकात
पांव ना टिके धरती पर और वो बस उड़ती रहे हवाओं में ! पांव ना टिके धरती पर और वो बस उड़ती रहे हवाओं में !
छोड़ो भी इस गुस्से को अब आ जाओ। छोड़ो भी इस गुस्से को अब आ जाओ।
खारी-खारी बूंदें भी अमूल्य लगने लगती है ! खारी-खारी बूंदें भी अमूल्य लगने लगती है !
वो तुम्हारे गहरे आँखों को शून्यता में दिख जाऊँगी। वो तुम्हारे गहरे आँखों को शून्यता में दिख जाऊँगी।
एक बार मेरी अधूरी कहानियों में प्रेमिका बन जाओ जिन्हें आज भी बैठ कर तन्हा पढ़ता रहता हू एक बार मेरी अधूरी कहानियों में प्रेमिका बन जाओ जिन्हें आज भी बैठ कर तन्हा पढ़त...
उसके बाद मैं खुद को अब रुलाने से रहा। उसके बाद मैं खुद को अब रुलाने से रहा।
उस कैनवस पर जिस पर मेरी तस्वीर बनाई थी तुमने। उस कैनवस पर जिस पर मेरी तस्वीर बनाई थी तुमने।
तो बता क्या फिर से ऐसे ही तड़पाने आएगी तू। तो बता क्या फिर से ऐसे ही तड़पाने आएगी तू।
यह तुम्हारा ही नशा है, जिसने मुझे प्रेम में डुबोया है। यह तुम्हारा ही नशा है, जिसने मुझे प्रेम में डुबोया है।
जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न हो। जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न हो।
वक्त की लहरों में जो छूट गए थे हाथ से। वक्त की लहरों में जो छूट गए थे हाथ से।
अब शायद मौन हो गई हो रुह मेरी, पर तब भी, दिल में शायद धड़कनें बाकी है। अब शायद मौन हो गई हो रुह मेरी, पर तब भी, दिल में शायद धड़कनें बाकी ...
अब जी लो तुम अपनी जिंदगी अब कुछ नहीं है हमारे पास। अब जी लो तुम अपनी जिंदगी अब कुछ नहीं है हमारे पास।
सो को मेघ से लेकर स्वयं को अजर अमर समझूंगा मैं कालिदास तो नहीं किंतु।।।।। सो को मेघ से लेकर स्वयं को अजर अमर समझूंगा मैं कालिदास तो नहीं किंतु।।।।।
यही ख़्याल ख़्याल न होकर रूबरू कुछ कह देता। यही ख़्याल ख़्याल न होकर रूबरू कुछ कह देता।
खोल दो मुक्त होकर हृदय द्वार अब रूप अवगुंठ मे कब तलक यूं छिपाओगी तुम खोल दो मुक्त होकर हृदय द्वार अब रूप अवगुंठ मे कब तलक यूं छिपाओगी तुम
छिप रहा है चाँद, पत्तों में कहीं फिर तुझसे मिलने की चमक देकर। छिप रहा है चाँद, पत्तों में कहीं फिर तुझसे मिलने की चमक देकर।
एक दूसरे की धड़कन सुने, स्वर्ग की सैर पर चले। एक दूसरे की धड़कन सुने, स्वर्ग की सैर पर चले।
मैं से हम बनाने की उत्तकंठ अभिलाषा लिए तुम उस पल में एक योगाभ्यासिनी के स्वरुप मैं से हम बनाने की उत्तकंठ अभिलाषा लिए तुम उस पल में एक योगाभ्यासिनी...
लिखती हूँ तुम्हारी कलम से कुछ किस्सें कभी नगमें तुम खुशी की फसल काटो मैं। .. लिखती हूँ तुम्हारी कलम से कुछ किस्सें कभी नगमें तुम खुशी की फसल क...