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संजय असवाल "नूतन"

Abstract

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संजय असवाल "नूतन"

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मुक्त आत्मा

मुक्त आत्मा

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वो छोड़ गया 

अपना मृत 

खोखला शरीर,

अपनों के लिए

उनका कर्ज उतार कर,

पर आत्मा 

उसकी आजाद हो गई 

इस बंधन से,

अब उसे 

मोह के भटकन से 

मत रोको

जाने दो,

हासिल करने दो उसे 

अपनी आत्मा की 

अथाह ऊंचाइयां,

एक नए 

लक्ष्य के साथ।



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