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Manju Rani

Abstract Inspirational

4.5  

Manju Rani

Abstract Inspirational

मत खोद,मत खोद

मत खोद,मत खोद

2 mins
400


खोदना है तो अपने

अंतः को खोदो ।

जमीनों को खोदने

से क्या मिलेगा ?

जमीनों में खुदे

इतिहास से क्या सीखा ?


सदियों से दानव और मानव

का युद्ध होता आ रहा ।

जीतता सदा मानव था ,

पर अब दानव जीत रहा ।


मानव नहीं समझ रहा

अपनी राहें भटक गया ।

अपने अहम को पराजित

न कर पा रहा

पथभ्रष्ट हो रहा ।


कंकालों के साथ खेल रहा ।

खंडरों में भटक रहा

गड़े मुर्दे उठा रहा

छानबीन कर रहा ।


पर आज नहीं सँवारा

भूत-भविष्य में फंसा

पिंजर-सा हुए जा रहा ।

कलयुग का प्राणी कल-पुर्जों

का आविष्कार कर रहा ।


पर

अपने को अभी तक

अविष्कृत नहीं कर पाया ।

लोभ, मोह, काम में फंसा

बस नए महाभारत का

आगाज़ कर रहा ।


राम-रहीम, कृष्ण-करीम का

अपवाद यही रह जाएगा ।

केवल तेरा कर्म ही

तेरे क्षितिज तक ले जाएगा ।

वही तुझ में और तेरे अमन में

सुख-शांति लाएगा ।


आज का कर्म ही

कल स्वर्ग बसाएगा ।

छोड़ रक्त-संहार

खुद भी जी और

औरों को भी जीने दे ।


प्रेम सुधा गंगा में बहा

उत्तर से दक्षिण तक

पूर्व से पश्चिम बहने दे।

यह प्रेम सुधा बहने दे ।


कल

जब तू इतिहास बनेगा

तो प्रेम ही बरसेगा ।

धरा नव-नूतन कली-सी

खील जाएगी और

यह चमन महक जाएगा ।


मानव तेरा कर्म ही

तुझे जिताएगा ।

गड़े मुर्दे मत खोद ,

मत खोद, मत खोद ।


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