STORYMIRROR

Ketankumar Kantilal Bagatharia "Rahi"

Tragedy

3  

Ketankumar Kantilal Bagatharia "Rahi"

Tragedy

मत भागो,,,,,,

मत भागो,,,,,,

1 min
243


मत भागो धन के पीछे

मानव, मतवाले 

ये प्रकृति का सृजन नहीं 

मानव उत्पत्ति 

ना संतोष ना तृप्ति 

मोह लालच सर्वदा वृष्टि 

भाग दोड पैसा 

व्यर्थ सदा 

पैसा धन कुछ भी कहो 

दौड सदा अनर्थ यहाँ ।


Prompt-11



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy