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Vijaykant Verma

Drama

3  

Vijaykant Verma

Drama

मस्ती

मस्ती

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"इस सच को सभी जानते हैं कि सेक्स हर इंसान की जरूरत है। सेक्स पर बातें करना या किसी के साथ सेक्स एंजॉय करना गलत नहीं है। सेक्स से ही ये सारी सृष्टि है, ये जीव जंतु है, इंसान है और इंसानियत भी है। सेक्स एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। क्योंकि ईश्वर ने संतानोत्पत्ति का जो सिस्टम बनाया है, उसे आप बदल नहीं सकते। और इसके लिए जरूरी है सेक्स के प्रति आकर्षण, किसी से प्यार, किसी से मोहब्बत और फुल एन्जॉयमेंट..! यहां एक विशेष बात ये भी है, कि अगर सेक्स में रुचि न हो, पूरा मजा न हो, तो बच्चे भी हृष्टपुष्ट और तंदुरुस्त नहीं होंगे। उनमें विकार भी हो सकता है। वो कमजोर भी हो सकते हैं। मानसिक रूप से भी और शारीरिक रूप से भी। इसलिए सेक्स की इच्छा को कभी दबाना मत। सेक्स में पूरी मस्ती और पूरा आनंद लेना।"

डॉ रवि ने ये सारी बातें जब मानसी को बताई, तो उसका मुरझाया चेहरा खिल उठा और उसने डॉक्टर साहब से कहा-" पर मेरे पति का विचार तो कुछ अलग ही है। उनकी सोच है कि सेक्स करने से शरीर में दुर्बलता आ जाती है। इसलिए वह सेक्स से परहेज करते हैं और अक्सर अपनी भावनाओं को रोक केर सेक्स की इच्छा को दबा देते हैं।"

"ओह नो, ये तो बहुत ही गलत बात है। अगर सेक्स की इच्छा को आप दबाने या रोकने की कोशिश करेंगे, तो इससे शरीर में बहुत से विकार उत्पन्न हो सकते हैं। क्योंकि ये प्रकृति के नियम के विरुद्ध है। और हम बीमार भी तभी पढ़ते हैं, जब प्रकृति के नियम के विरुद्ध कोई कार्य करते हैं। इसीलिए हमें अपनी अंदरुनी इच्छाओं को कभी मारना नहीं चाहिये।"

"ठीक है डॉक्टर साहब। आज मैं अपने पति से बात करूंगी। उन्हें पथरी और प्रोस्टेट की प्रॉब्लम है। हो सकता है इसका कारण भी सेक्स की इच्छा का दमन करना ही हो।"

"हां, यही सच है। इन सारी बीमारियों का कारण भी दूषित खानपान के साथ साथ सेक्स की क्रियाओं को जबरदस्ती रोकना भी है।" डॉक्टर साहब ने जोर देकर यह बात कही।

"थैंक्स डॉक्टर साहब", मानसी ने डॉक्टर साहब का धन्यवाद अदा किया और खुशी खुशी अपने घर आ गई।

दरअसल कई दिनों से मानसी सेक्स की उत्तेजना को लेकर परेशान थी। उसका पति मानदेव अक्सर उसके अंदर सेक्स की इच्छा को भड़का देता और खुद भी सेक्स करने को आतुर हो उठता, पर इस डर से कि वह कमजोर हो जाएगा, उसकी सारी ताकत चली जाएगी, वो बीच में ही अपने को रोक लेता।और तब मानसी तड़प कर रह जाती, पर कुछ भी न कर पाती।

रोज की तरह आज भी शाम को करीब छः बजे उसका पति मानदेव ऑफिस से घर आया, पर आज कुछ ज्यादा ही खुश दिख रहा था वो। उसने मानसी से एक अच्छी सी चाय बनाने को कहा। समोसे वो अपने साथ लाया था।

मानसी उसे देखते ही बोली-"क्या बात है, आज बहुत खुश दिख रहे हो?"

"हां आज रियली मैं बहुत खुश हूं। पर तुम भी आज बहुत खुश दिख रही हो। रोज जब मैं घर आता था, तो ऐसा लगता था, जैसे तुम्हारे चेहरे पर बारह बजे हो, लेकिन आज तो तुम्हारे चेहरे पर एक अजीब सी रौनक है।"

"हां ये तो सच है, क्योंकि आज मैं वास्तव में बहुत खुश हूं। लेकिन इसका कारण मैं तुमको बाद में बताऊंगी। रात में सोते समय।"

"ओके डार्लिंग। मैं भी आज रात में तुमको कुछ ऐसी बात बताऊंगा कि तुम और भी खुश हो जाओगी। और सुनो, आज तुम जो कहोगी, जैसा कहोगी, मैं हर बात तुम्हारी मानूंगा और आज़ से सारे काम तुम्हारी इच्छा के अनुसार ही करूंगा।"

"क्या बात है यार। ये इतना बदलाव आपमे आज अचानक..?"

"हां, पर ये एक राज है डार्लिंग, जिसका पर्दाफाश मैं भी अब रात में ही करूंगा जब तुम सारे काम धाम निपटा कर फुर्सत में होगी।"

"ओके", मानसी ये कहकर किचन में चाय बनानें चली गई। थोड़ी देर में ही वो बढ़ियां सी चाय बना कर ले आई। फिर दोनों ने गरमा गरम समोसे के साथ चाय का मजा लिया।

"मानसी", मानदेव ने चाय पीते हुये कहा,"अभी छः बजे हैं। बहुत दिन हो गया हम दोनों को सिनेमाहाल में कोई पिक्चर देखें। क्यो न हम दोनों आज साथ चलकर एक पिक्चर देखें। कोई मजेदार पिक्चर।"

"यह तो बहुत अच्छी बात है। कितने साल हो गए हम दोनों को पिक्चर देखें। शायद पिछली पिक्चर सिनेमा हाल में हम दोनों ने शादी के 1 महीने बाद देखी थी। तब से आज तक हम दोनों ने जितनी पिक्चरें भी देखी है, टीवी पर ही देखी है।"

"सही कहा मानसी तुमने, पर बड़े पर्दे पर पिक्चर देखने का मजा कुछ और ही होता है।" मानदेव ने कहा

तो चलो, अब देर न करो और फटाफट तैयार हो जाओ। वेव में इस समय एक बहुत ही मस्त फिल्म 'वजह तुम हो' लगी है। उसी को देखते हैं। सुना है बहुत हॉट फिल्म है।"

"फिर तो जरूर इसी फिल्म को हम देखेंगे", मानसी ने खुश होते हुए कहा और फटाफट तैयार हो गई। मानदेव तो पहले से ही सुटेड-बुटेड था। उसने अपनी कार निकाली, और दोनों वेव सिनेमा पहुंच गए। फिल्म में अच्छी खासी भीड़ थी।उन्होंने टिकट लिया और अंदर चले गए। फ़िल्म बहुत ही मस्त थी। कई बोल्ड सीन भी थे। सना खान और शर्लिन चोपड़ा के कई सेक्सी सीन देख मजा आ गया। पिक्चर देखते समय बीच बीच में कई बार मानदेव ने मानसी के अंदरूनी अंगों को दबाने का सुख भी प्राप्त किया, जिसका उसने बिल्कुल भी बुरा नहीं माना, बल्कि कोआपरेट किया। रात का खाना उन्होंने वहीं एक रेस्त्रां में खाया और करीब ग्यारह बजे अपने घर को लौटे। घर पहुंचते ही मानदेव ने उसे अपने बाहों में समेट लिया और उसका चुंबन लेते हुए एक कप चाय बनाने को कहा और अपने कपड़े उतार कर बेड पर लेट गया। थोड़ी ही देर में मानसी भी चाय बना कर ले आई। इस समय उसने रेड कलर की एक बहुत ही खूबसूरत बड़े गले का गाउन पहन रखा था, जिसमें से उसका सुडोल वक्ष प्रत्यक्ष दिख रहा था।

"उफ्फ! आज तो बेहद खूबसूरत लग रही हो जानेमन। लगता है जान लेकर ही रहोगी।" बहुत ही मस्त अंदाज़ में मानसी के बालों में हाथ फेरते हुए उसने कहा।

"और आप भी तो बहुत मस्त दिख रहे हैं", मानसी ने चाय का एक घूंट पीते हुए कहा।

"बहुत अच्छी चाय बनाई है आज तुमने।", मानदेव ने भी चाय पीते हुए कहा

"ऐसी बात नहीं है। जब दिल में प्यार उमड़ रहा हो, तो उस समय चाय हो या कुछ और, टेस्ट अपने आप कई गुना बढ़ जाता है"

"हां, ये तो तुमने बिल्कुल सही कहा।"

"थैंक्स, अब फटाफट मुझे आप ये बताइए कि आप आज इतना खुश क्यों हैं? क्या वेतन में इजाफा हो गया है? या कोई और बात है ?

"वेतन तो वही है यार, पर एक नई बात आज मुझे पता लगी है। मेरे एक मित्र डॉक्टर हैं। मैं उनके यहां गया था और उन्हें अपनी बीमारी और सेक्स समस्या के बारे में बताया तो उन्होंने मालूम है क्या कहा? उन्होंने कहा कि मैं अपनी सेक्स भावनाओं को और अपनी अंदरूनी इच्छाओं को जबरदस्ती दबाता हूं, इसी कारण मेरे को बहुत सी बीमारी हो गई है। अब तक मैं यह सोचता था की सेक्स न करने से इंसान की ताकत बढ़ती है, वो स्वस्थ रहता है और उसकी आयु लंबी होती है, पर मेरे उस दोस्त ने मेरी इन सारी बातों को गलत साबित कर दिया। उसने कहा, कि सेक्स करने से बीमारियां बढ़ती नहीं, बल्कि सेक्स करने से बहुत सी बीमारियों का खात्मा हो जाता है और शरीर स्वस्थ रहता है। और जब शरीर स्वस्थ रहेगा तो उम्र भी लंबी होगी। सेक्स करने से कमजोरी भी नहीं आती।बल्कि कमजोरी तो सेक्स न करने से आती है। सेक्स को दबाने और अपनी इच्छाओं को रोकने से आती है।"

"अरे यही बात तो मैं भी आपसे कहने वाली थी।" मानसी ने खुश होते हुये कहा-"आज मैं डॉक्टर रवि के यहां गई थी। उन्होंने भी मुझसे यही बातें कहीं। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं आपको समझाऊं, कि आप जो कुछ कर रहे हैं, गलत कर रहे हैं। जिंदगी में जितना मजे से जिएंगे, आनंद से जिएंगे, उतना ही खुश रहेंगे। स्वस्थ रहेंगे। और बीमारियों से दूर रहेंगे।इच्छाओं का दमन करना, खुशियों का दमन करना, यही बीमारियों की जड़ है।"

"ओह! काश, यह बात पहले ही हम दोनों को पता होती, तो इतने दिनों तक हम दोनों एक दूसरे से दूर न होते। पूरी मस्ती के साथ सेक्स का मजा लेते। पर कोई बात नहीं, आओ, आज हम दोनों खुलकर एंजॉय करें, और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे। चाहे वो लड़का हो या लड़की, पर स्वस्थ हो। और जो हमारे जीवन में खुशियां भर दे, रौनक ला दे, किलकारियां ला दे और हमारे हर सपनों को साकार कर दे।" यह कहते हुए मानदेव ने बत्ती बुझा दी और मानसी को अपनी बाहों में समेट लिया।


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