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Vijaykant Verma

Abstract

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Vijaykant Verma

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सूखा पत्ता

सूखा पत्ता

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एक सूखा पत्ता

किसी का गुलाम नहीं होता, 

कमजोर होता है

मगर स्वतंत्र होता है,

जिधर हवा उड़ा दे

उधर चला जाता है,

दिल में न कोई डर

न कोई खौंफ होता है..!!


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