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Antariksha Saha

Romance

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Antariksha Saha

Romance

मोहलत

मोहलत

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थोड़ी मोहलत मांगता हूँ रब

बस एक बार उनका दीदार हो जाए

फासले जो फैसलों की वजह से थे

बस उस पर सुलह हो जाए!

यूँ रूठना भी कुछ होता है क्या

एक बार मुड़ना तो बनता है ना यार

रो तू भी रही थी मैं भी

एक बार मिलाना तो बनता है ना यार !

ए खुदा बोल तेरी रज़ा है क्या

इन दूरियों की वजह है क्या

मांग ता कुछ नहीं तुझसे

बस इस बेरुखी की खता है क्या !


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