मोहब्बत कभी नाउम्मीद नहीं करती
मोहब्बत कभी नाउम्मीद नहीं करती
आज का अंत हुआ
दिन बीता
शाम का आगमन हुआ
शाम के बाद
रात तो आयेगी ही
अपने साथ एक सुनहरे चांद और
टिमटिमाते तारों का एक
झिलमिलाता उपहार तो लेकर
आयेगी ही
दिन भर मैंने क्या किया
क्या नहीं किया
आज का दिन मैंने कैसे
बिताया
यह कहानी मेरे दिल की
कलम से
भावनाओं में भीगी स्याही से
मोहब्बत के बिखरे मोतियों सी
कतरा कतरा
रात के आसमान के बदन की
तख्ती पर लिखी तो अवश्य जायेगी
ही
एक चांद ही तो है जो
हर रोज मेरी बातों को
बहुत ही ध्यानपूर्वक और
गौर से सुनता है
मेरे पास आने के लिए
वह अपना आकार भी
कितना बड़ा कर लेता है
शायद अपने आगोश में
भरकर मुझे
वह अपने सीने से लगाना
चाहता है
मेरा साथी बनकर
मेरे सुख दुख बांटने चाहता है
कभी कभी मेरे साथ साथ
वह भी रो पड़ता है
दिल उसका भी मेरी तरह ही है
एक फूल सा कोमल तो
वह भी मेरी तरह ही
हर किसी के दुख दर्द
महसूस करता है
आसमान से जो तारा
टूटकर मेरी रूह के मकान की
छत पर गिरता है
वह चांद की आंख से गिरा
एक आंसू ही होता है
किसी बात को मानो तभी तो
उस पर यकीन होता है
मोहब्बत भी दो दिलों के बीच
पनपती एक यकीन की
इमारत पर टिकी ही एक कहानी है
यकीन आसमान को जमीन पर
न हो तो
दूर रहकर भी ऐसे कहां किसी को
मोहब्बत की बातों और अहसासों पे
यकीन होता है
रात भी अस्थाई है
अपना समय पूरा करेगी और
मोहब्बत के चढ़ते उतरते
पैमाने की तरह
छलककर कहीं गायब हो जायेगी
लेकिन यह मेरा अनुभव है कि
यह वापिस लौटकर आयेगी
यह जाती है पर वापिस लौटकर भी
आती है
एक दिल से कभी न खत्म होती
आखिरी सांस तक
स्थाई रहती सच्ची मोहब्बत की ही
तरह लेकिन
यह बीच में विश्राम लेती है
थोड़ा सा समय लेती है
स्थाई तौर पर नहीं
अस्थाई तौर पर जाती है
ठीक उसी तरह जिस तरह से
रात के बाद दिन निकलता है
सूरज का उदय होता है
एक उम्मीद का दीपक जलता है
मोहब्बत भी तो कभी किसी
सच्चे प्रेम करने वाले को
नाउम्मीद नहीं करती
एक रात के गुजर जाने के बाद
एक नये दिन, एक नई सुबह और एक नये
सूरज की तरह वह वापिस लौटकर
एक प्रेमी हृदय के जीवन में अवश्य
आती है।

