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Pinky Dubey

Tragedy Inspirational


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Pinky Dubey

Tragedy Inspirational


मंज़िल को पाना है

मंज़िल को पाना है

1 min 211 1 min 211

रोज सोने से पहले मंज़िल को देखता हूँ

रोज सवेरे उठकर अपनी मंज़िल को देखता हूँ

और उसकी चाह में उठता हूँ

मंज़िल है दूर उस मंज़िल को पाने के लिए लोग है भरपूर

कॉम्पिटिशन है ज़बरदस्त

मंज़िल को पाना है भीड़ को तोड़ना है

जम कर मेहनत करनी है दौड़ लगाना है

कभी हूँ आगे तो कभी हूँ  पीछे

आगे निकलना आसान नहीं है

नए तरीके नए राह चुनना है

दौड़ में सबसे आगे निकलना है

शतरंज की है यह बाज़ी में एक मोहरा हूँ

आगे है तेज़ खिलाड़ी

उनकी बाज़ी को समझ उनको चेकमेट देना है

यह दौड़ है अजीब खतम ही नहीं होती

रोज हारता हूँ मायूस होता हूँ

मगर फिर सवेरे उठता हूँ फिर कोशिश करता हूँ

की काश आज बाज़ी पलट सकूँ

और जीत के अपनी मंज़िल को पा सकूँ

ठान लिया है कुछ भी हो जाए मंज़िल को पाना है

मेहनत कर कुछ बन के दिखाना है


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