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Srishti Gangwar

Tragedy

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Srishti Gangwar

Tragedy

मनुष्य मन का मैला

मनुष्य मन का मैला

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मन जिसका मैला होता है

अपनो की भीड़ में भी वो अकेला होता है

देकर धोखा अपनो को

कैसे वो चैन से सोता है

एहसास नहीं उसको होता है

कि धोखे का फल बुरा ही होता है

वक्त जब गुजरता जाता है

उसके पापों का घड़ा भरता जाता है

हो जाते हैं जब दिन बुरे उसके तो

खुदा को दोषी ठहराता है।



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