मणिपुर
मणिपुर
तीन माह गये जलते
काहे सुध न लीन्हि।
मणिपुर की स्त्रियाँ है जे खेल खिलौने नाहीं।
जनता यह पागल भई जो मान दे पायी।
कैसी माई होई जन्म दियो इन ललन को ।
फट हृदय हाथ आयो, देख करनी ललन की।
दूध लजायो कोख लजाई
इन दुष्टों ने।..
पकड़ इन्हें, जेल डालो
सजा दयो तउम्र की।
हाथ जोड़ विनती करहूँ, ललन समझा दियो।
सब स्त्रियाँ देवी है, लाज सबै बराबर है।
मणिपुर जैसी घटना घटे कभी दोबारा।
लाज रखौ सबकी प्रभु जनम लियो दोबारा।
चौपाई लिखने का प्रथम प्रयास
