मन
मन
बाल मन बड़ा हठीला,
करता है अपनी मन मानी
होता है नादान तो।।
तो होता है कभी अज्ञानी।
जिद पर एकदम अडिग
तो बात मनवाने में एकदम सच्चे
बाल मन कोई नहीं समझ पाया।
कैसी है ये कहानी
जो समझ गया इनके मन को
वो है साक्षात परम ज्ञानी।
