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Neelam Arora

Abstract

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Neelam Arora

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मन का बक्सा

मन का बक्सा

1 min
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एक दिन

फुरसत में टटोला,

मन के बक्से को,

भरा पड़ा था !

एक कोने में

पुरानी बोझिल सी

यादों के गट्ठर रखे थे !

नीचे कुछ फाइलें

दबी पड़ी थी,

खोल के देखा तो

ख्वाहिशों की अर्जियां थी !

कुछ सुनहरी जिल्द वाले

छोटे छोटे डिब्बे भी थे,

जिनमें दोस्तों संग बीते

पलों के उपहार बंधे थे !

अचानक छिल गई अंगुलि,

लहूलुहान हो गई,

गौर से संभाला तो,

वो टूटे ख्वाबों की सहेजी

कोई कांच की किरच थी !

एक सुगंधित इत्र की

खूबसूरत बोतल भी थी,

जिसमें पहले प्यार की

महक भरी थी !

पुरानी किताब में

रखा था सूखा फूल,

उसके साथ गुजारे वक्त की

खुशबू समेटे था ! !



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