मन ही तो है ...
मन ही तो है ...
मन ही तो है
कभी कुछ सोचता
कभी कुछ कहता
कभी मनमानी
कभी नादानी
कभी जिद्द -कभी जुनून
कभी पलभर में अपना सा
तो, कभी पलभर में पराया सा
जीवन पुंज की जोत है- मन
मानव शरीर रूपी रथ का स्वत :
संचालित यान है -मन
मन चाहे तो जोड़ दे,
मन चाहे तो तोड़ दे ,
मन के जीते -जीत भी ,
मन के हारे -हार भी ,
अब
मन ही जाने मन को
मन की अपनी रीत
आखिर मन ही तो है ॥
मीनाक्षी प्रकाश
