STORYMIRROR

Minakshi Prakash

Abstract

3  

Minakshi Prakash

Abstract

तुम्हारी हंसी

तुम्हारी हंसी

1 min
15

धीमी सी 

तुम्हारी हंसी ,

खिलखिलाती सी 

तुम्हारी हंसी,

मुसकुराती सी

भँवरों के गुनगुनाती सी 

 तुम्हारी हंसी,

 जुगनू से जगमगाती 

तुम्हारी हंसी,

मेरे मन के वीणा के 

तारों सी 

तुम्हारी हंसी II



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract