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Minakshi Prakash

Abstract

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Minakshi Prakash

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तुम्हारी हंसी

तुम्हारी हंसी

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धीमी सी 

तुम्हारी हंसी ,

खिलखिलाती सी 

तुम्हारी हंसी,

मुसकुराती सी

भँवरों के गुनगुनाती सी 

 तुम्हारी हंसी,

 जुगनू से जगमगाती 

तुम्हारी हंसी,

मेरे मन के वीणा के 

तारों सी 

तुम्हारी हंसी II



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