STORYMIRROR

Dr. Natasha Kushwaha

Fantasy

3  

Dr. Natasha Kushwaha

Fantasy

मजदूर/श्रम

मजदूर/श्रम

1 min
196

स्वेद से परिपूर्ण हूं मैं

अश्रु भाव से पूर्ण हूं मैं


कर्मठ हूं मैं बोझिल नहीं

समरूपता से ओझल नहीं


एओ, ओय कहते सभी

आत्मीयता ना देते कभी


नाम से गुमनाम हूं मैं

श्रमिक रूप पहचान हूं मैं


दैनिक वेतन अर्जक हैं हम

मजदूर हैं, नहीं दर्शक हैं हम


तिनका तिनका जोड़कर

भत्ते में भी भत्ता छोड़कर


रोजाना घर चलते है हम

हम नहीं है किसी से कम।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy