Dr.vishnu Prasad Vaishnav
Children
मिठ्ठू मियां बड़े रंगीले,
मिर्ची खाते चाव से ।
उड़ते हैं भई नील गगन में,
रहते समता भाव से।।
मोर
गौरेया
कोयल
बंदर मामा
मिठ्ठू
दैनिक जीवन में विज्ञान कर रहा है बड़ा कमाल। दैनिक जीवन में विज्ञान कर रहा है बड़ा कमाल।
रोज सवेरे नहला कर के उसको खूब सजाती थी, रोज सवेरे नहला कर के उसको खूब सजाती थी,
पापा के कंधे और माँ की गोदी में सोकर सुकून उन्हें दिलाया होगा। पापा के कंधे और माँ की गोदी में सोकर सुकून उन्हें दिलाया होगा।
सबकी आंखों का तारा बन जाऊं। जी करता है मैं फिर से बच्ची बन जाऊं। सबकी आंखों का तारा बन जाऊं। जी करता है मैं फिर से बच्ची बन जाऊं।
मिले ऐसा हंसी वो हम सफ़र आज़म मुहब्बत का मगर वादा करे कोई। मिले ऐसा हंसी वो हम सफ़र आज़म मुहब्बत का मगर वादा करे कोई।
था मज़ेदार बहुत ये खेल लुक छिपी बचपन की। था मज़ेदार बहुत ये खेल लुक छिपी बचपन की।
आओ बचाएं पानी को घर-घर की कहानी को आओ बचाएं पानी को घर-घर की कहानी को
जो दूसरों के लिए जीते हैं, वे लोग खुश और संतुष्ट होते हैं। जो दूसरों के लिए जीते हैं, वे लोग खुश और संतुष्ट होते हैं।
ये निःशब्द सी प्रकृति भी तेरे अधीन है, सारी दुनिया है तेरे वश में सब तेरे अधीन है। ये निःशब्द सी प्रकृति भी तेरे अधीन है, सारी दुनिया है तेरे वश में सब तेरे अधी...
क्या आप जानते हैं कि बर्फ के टुकड़े खुद को कभी नहीं दोहराते हैं, क्या आप जानते हैं कि बर्फ के टुकड़े खुद को कभी नहीं दोहराते हैं,
जिसे आज़म वफ़ा दी ख़ूब दिल से मुहब्बत में गया दे मात प्यारे। जिसे आज़म वफ़ा दी ख़ूब दिल से मुहब्बत में गया दे मात प्यारे।
उदासी को दूर भगाएं। अवसाद से ज्यादा संक्रामक कुछ भी नहीं है। उदासी को दूर भगाएं। अवसाद से ज्यादा संक्रामक कुछ भी नहीं है।
जैसी लड़कियां और सबसे खास सर्कस का वो जोकर। जैसी लड़कियां और सबसे खास सर्कस का वो जोकर।
सारी सृष्टि के मालिक हो, फिर भी बालक बन के जन्मे सारी सृष्टि के मालिक हो, फिर भी बालक बन के जन्मे
सुबह के अभी ५:३० बजने को हैं, हलचल में अब और जरा तेज़ी है, सुबह के अभी ५:३० बजने को हैं, हलचल में अब और जरा तेज़ी है,
सर्दी, गर्मी या बरसात, हमें सारे मौसम भाते हैं सर्दी, गर्मी या बरसात, हमें सारे मौसम भाते हैं
मैं हूं पेड़ मुझे मत काटो। टुकड़ो टुकड़ो में मुझे मत बांटो। मैं हूं पेड़ मुझे मत काटो। टुकड़ो टुकड़ो में मुझे मत बांटो।
चन्दा मामा दूर के, पूवआ पकाए गुड़ के। चन्दा मामा दूर के, पूवआ पकाए गुड़ के।
जनता में कैंसर के प्रति जागरूकता का अभाव आज नजर आया है। जनता में कैंसर के प्रति जागरूकता का अभाव आज नजर आया है।
सावन की छटा निराली, छाई है कैसी हरियाली। सावन की छटा निराली, छाई है कैसी हरियाली।