Dr.vishnu Prasad Vaishnav
Children
मिठ्ठू मियां बड़े रंगीले,
मिर्ची खाते चाव से ।
उड़ते हैं भई नील गगन में,
रहते समता भाव से।।
मोर
गौरेया
कोयल
बंदर मामा
मिठ्ठू
ऐसा नहीं है कि मां मेरे ऐसा करने से रूठती नहीं। कभी-कभी गुस्से की उसकी डांट भी खा लिया ऐसा नहीं है कि मां मेरे ऐसा करने से रूठती नहीं। कभी-कभी गुस्से की उसकी डांट भ...
अ से अनार आ से आम हिंदी का बड़ा हो नाम। अ से अनार आ से आम हिंदी का बड़ा हो नाम।
माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़वा। माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़व...
तुम्हारी आंखों की चमक, मेरे दिल में उजाला करती है, तुम्हारी आंखों की चमक, मेरे दिल में उजाला करती है,
फिर इक रोटी और दो बूंद पानी का दाम ये पैसा चुका ना पाएगा, फिर तिरस्कृत और अक्षम्य मनुष फिर इक रोटी और दो बूंद पानी का दाम ये पैसा चुका ना पाएगा, फिर तिरस्कृत और अक्...
हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल। हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल।
नहीं चाहिए थी गाड़ी, बस, और न वायुयान। उड़ते-उड़ते ही लख लेती, सारा हिन्दुस्तान। नहीं चाहिए थी गाड़ी, बस, और न वायुयान। उड़ते-उड़ते ही लख लेती, सारा हि...
ऐ धरा, तू इतनी अशांत क्यों है, हाँ मानती हूँ कितना कष्ट है तेरे कण कण में. ऐ धरा, तू इतनी अशांत क्यों है, हाँ मानती हूँ कितना कष्ट है तेरे कण कण में.
क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी पे टँगी रहती है क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी...
आये जो कोई आँच देश पर हम अपनी जान लुटा देंगे आये जो कोई आँच देश पर हम अपनी जान लुटा देंगे
Like my peers, I may not be talented My progress may be slow Like my peers, I may not be talented My progress may be slow
पूछे हमारा हाल दें हमें सम्मान पर थी नादानी यह हमारी, नासमझी अपनी पूछे हमारा हाल दें हमें सम्मान पर थी नादानी यह हमारी, नासमझी अपनी
तू क्या जाने भेद इस जग का, मैं हर कण का ज्ञान दिलाऊंगी। तू नन्हीं सी चिड़िया मेरी। तू क्या जाने भेद इस जग का, मैं हर कण का ज्ञान दिलाऊंगी। तू नन्हीं सी चिड़िया मे...
बुद्धिमान हैं छोटे लाल यह था उनका सबसे बड़ा कमाल। बुद्धिमान हैं छोटे लाल यह था उनका सबसे बड़ा कमाल।
गाँधी बापू का था यह सपना, बना ना सके जिसे अभी तक हम अपना।।। गाँधी बापू का था यह सपना, बना ना सके जिसे अभी तक हम अपना।।।
बच्चों देखो यह दुनिया कितनी रंगीन, बंधकर जीवन में मत करो इसे संगीन। बच्चों देखो यह दुनिया कितनी रंगीन, बंधकर जीवन में मत करो इसे संगीन।
भटक कर ज़िन्दगी की हर सड़क नाप डाली है चिलचिलाती धूप हो या बरसात की बौछारें भटक कर ज़िन्दगी की हर सड़क नाप डाली है चिलचिलाती धूप हो या बरसात की बौछारें
प्रातःकाल में जो प्रतिदिन, प्रेरित कर हमें जगाता है। प्रातःकाल में जो प्रतिदिन, प्रेरित कर हमें जगाता है।
बचपन के वो दिन बचपन के वो दिन
अपना काम जो छोड़ा, तुमने किसी दूजे के सहारे। पूरा होना उसका मुश्किल है, बिना लगे ही तुम्हारे। सच ही ... अपना काम जो छोड़ा, तुमने किसी दूजे के सहारे। पूरा होना उसका मुश्किल है, बिना लगे...