" मित्र "
" मित्र "
मित्र ही एक ऐसा प्राणी है,
जिससे हम अपनी अंतरमन की
बातें कह सकते हैं,
जिसके पास मित्र हैं वही सबसे
धनी हैं ,
मित्र की कमी रहने पर व्यक्ति अधूरा
रह जाता है।
न जगह की परवाह,
न समय का ध्यान,
बस करते चलो हंसी - ठिठोली
करते हुए,
जीवन का रास्ता तय मित्र के साथ ।
हर समय कठिन परिस्थितियों में
हमेशा मित्र को ही
अपने पास पाना
यही है मित्र की विशालता ।
जिंदगी का हर जंग ,
मित्र के साथ जीता जा सकता है,
मित्र बनाने में गरीब -अमीरी का
भेदभाव नहीं होता ,
न ही रंग का , न ही जात- पात का
भेदभाव होता है।
मित्र तो बस मित्र होता है,
वह बहुत अनमोल होता है,
हां , मित्र बस सच्चा और अच्छा
होना चाहिए।
कृष्ण और सुदामा की तरह
बेमिसाल ।
मित्र अच्छे बनो और बनाओ ,
तभी जिंदगी की गाड़ी पटरी पर
चलती रहेगी ,
मित्र खुशियों की चाभी है ,
जिसे संभाल कर रखनी चाहिए।
