STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Abstract Inspirational

3  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Abstract Inspirational

मिथ्या के साधक आते

मिथ्या के साधक आते

1 min
199

देखो मिथ्या है राष्ट्रवाद की परिभाषा,

व्यर्थ है जातिय धर्मी जय की पिपासा,

सत्ता भोग में मंचवासा,

ना काहू को त्रिमाचा,

बड़े बड़े भोग विलासी,

मंच पर मिथ्या भाषी,

रुप अनेक दिखाते,

मिथ्या के साधक आते,

मंच पर तंज पर,

कल घोषणा कर जाते।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract