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niraj shah

Romance

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niraj shah

Romance

मेरी रूह मेरी जान

मेरी रूह मेरी जान

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अंश थे मेरे जिस्म के 

और अब मेरी पहचान हो।


ज़िन्दगी की नज़्म का 

तुम एक हसीं उन्वान हो।

 

मेरे जिस्म से बाहर जो रहती, 

मेरी रूह हो मेरी जान हो।


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