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Rajit ram Ranjan

Romance

4  

Rajit ram Ranjan

Romance

मेरी रहबर

मेरी रहबर

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उसके आँखों के 

काले काजल, 

गोरे-गोरे 

गाल, 

करें बेहाल, 

होठों पे 

मधुशाला, 

सब गड़बड़ 

घोटाला, 

जुल्फ घनेरी 

शाम, 

जैसे छलकता 

जाम, 

पल भर को ना 

आराम, 

बेरोजगारी ना कोई 

काम, 

बलखाती कमर, 

बाली उमर, 

तिरछी नजर, 

करें बेखबर, 

ना हो सबर, 

जाये तो जाये 

किधर, 

मोहब्बत का चादर 

ओढ़े, 

मोहतरमा 

चली आ रही थी 

इधर, 

उसपे पड़ी जब 

मेरी नजर, 

लगा ऐसा 

जैसे 

वही हैं, 

मेरी रहबर!


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