मेरी माँ
मेरी माँ
हर मुश्किल में मेरा साथ निभाती,
बिगड़े मेरे सारे ही काम बनाती है ,
मधुर –मधुर से सपने मुझे दिखाती
जी हाँ वो तो मेरी माँ कहलाती है ,
हर बुराईयों से मुझे बचाकर रखती ,
जीवन का मुझको सार सिखलाती ,
कोमल दिल में हमेशा उसके रहती,
जी हाँ वो तो मेरी माँ कहलाती है ,
हर शब्द माँ से ही पूर्ण हो जाता है,
पहला अक्षर माँ से ही सीखा होता है,
सफलता की पहली सीख जिसने दी ,
जी हाँ वो तो मेरी माँ कहलाती है ,
दुनिया की इस भीड़ में गुम हो जाता ,
माँ की वो आँखें खोज लेती मुझको ,
जिन आँखों में सिर्फ मेरे सपने पलते हैं ,
जी हाँ वो तो मेरी माँ कहलाती है ,
संस्कारों की पूंजी जिनसे मिली मुझे ,
रिश्तों को निभाना हमेशा सिखाया है ,
निश्छल प्यार अपना जिसने लुटाया है,
जी हाँ वो तो मेरी माँ कहलाती है।
