Gajanan Pandey
Abstract
मेरी बहन
तुम क्यों रूठी हो ?
तुम्हारी मुस्कान से हम - तुम हैं
जीवन में मासूमियत का हर पल है ।
मन आईना है
रंग
संस्कारों से ...
जिंदगी का सफर
समय
पुस्तक
ईश्वर
स्वास्थ्य ही ...
क्या भूलूँ, क...
हमारे हाथ कर्...
जल, जंगल , जमीन को मेरे, अगर नहीं बचाएगा सुंदर, स्वच्छ, हरा- भरा, पर्यावरण कहाँ से जल, जंगल , जमीन को मेरे, अगर नहीं बचाएगा सुंदर, स्वच्छ, हरा- भरा, पर्...
पूरा संसार न जाने किस शोर में डूब गया, गम की आंधी आई और सब बिखर गया ! पूरा संसार न जाने किस शोर में डूब गया, गम की आंधी आई और सब बिखर गया !
जीवन मिला है तो मृत्यु भी एक शाश्वत सच्चाई है, जीवन मिला है तो मृत्यु भी एक शाश्वत सच्चाई है,
सदा से ही सच झूठ के जंग में सच कभी हारा नहीं। सदा से ही सच झूठ के जंग में सच कभी हारा नहीं।
मसनदों से आरजू है चैन की नींद तो दिला दे । मसनदों से आरजू है चैन की नींद तो दिला दे ।
दिल कुछ और कह रहा है, दिमाग कुछ और, किसकी सुननी चाहिए, जाऊं किस ओर? दिल कुछ और कह रहा है, दिमाग कुछ और, किसकी सुननी चाहिए, जाऊं किस ओर?
खुद को अब दबा लिया है तमाम उलजुलूल से दिखते तमाशों के बीच। खुद को अब दबा लिया है तमाम उलजुलूल से दिखते तमाशों के बीच।
मुझसे देखी नहींं जाती जब तक जान न लूँ बिटिया ठीक है नींद नहींं आती। मुझसे देखी नहींं जाती जब तक जान न लूँ बिटिया ठीक है नींद नहींं आती।
हँसता है ये आसमाँ, बेगानी सी है ये जमीं कहता है ये अन्तर्मन, क्यूँ हूँ मैं अब भी यहीं। हँसता है ये आसमाँ, बेगानी सी है ये जमीं कहता है ये अन्तर्मन, क्यूँ हूँ मैं अ...
गर्म गर्म गर्मी से जब दहकती हैं हवाएं भरी जेठ में जब झुलसाती हैं सदाएं। गर्म गर्म गर्मी से जब दहकती हैं हवाएं भरी जेठ में जब झुलसाती हैं सदाएं।
चलने वाली परीक्षा को ईमानदारी से ही दीजिये। चलने वाली परीक्षा को ईमानदारी से ही दीजिये।
दिल डूबा क्यों फ़िर उसकी चाहत में है वो ही जब डूबी आँखें नफ़रत में. दिल डूबा क्यों फ़िर उसकी चाहत में है वो ही जब डूबी आँखें नफ़रत में.
एक तरफ जब पार्थ खड़े थे दुर्योधन भी झुकता था। एक तरफ जब पार्थ खड़े थे दुर्योधन भी झुकता था।
उसकी अदाकारी में जितनी मक्कारी है। हमारी ईमानदारी में उतनी ही खुद्दारी है। उसकी अदाकारी में जितनी मक्कारी है। हमारी ईमानदारी में उतनी ही खुद्दारी है।
तुम सब लड़ना तुम ही हो सब देश के सच्चे इंसान तुम सब लड़ना तुम ही हो सब देश के सच्चे इंसान
समुद्र समुद्र
मन उद्वेलित होता, "राज' को सारे रिश्ते बेगाने लगते हैं। मन उद्वेलित होता, "राज' को सारे रिश्ते बेगाने लगते हैं।
जो चले सूझबूझ से अपने गुणरुपी सेना संग चाल। जो चले सूझबूझ से अपने गुणरुपी सेना संग चाल।
तेरे सामने करती जी भर कर अपना अभ्यास, बताती है ठीक है या करना होगा और प्रयास तेरे सामने करती जी भर कर अपना अभ्यास, बताती है ठीक है या करना होगा और प्रयास
नील-गगन के कृष्ण-वसन को, धीरे-धीरे दरकते हुए, पल-पल बदलते रक्त, पीत, श्वेत रंगों का नील-गगन के कृष्ण-वसन को, धीरे-धीरे दरकते हुए, पल-पल बदलते रक्त, पीत, श...