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Praveen Gola

Romance

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Praveen Gola

Romance

मेरे शब्दों को हवा लग जाती है

मेरे शब्दों को हवा लग जाती है

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मेरे शब्दों को हवा लग जाती है ,
देख तेरे आने से सनम ,
ये इतने बेजार हो गये थे कि ,
लिखते हुए भी इनका निकलता था दम |

वो एहसास ~ए ~इश्क मर जाता था ,
ना काल्पनिक ख्याल कोई आता था ,
ये भी घुट - घुट कर जीते थे ,
तेरे ख्यालों को दिल में सीते थे |

तेरे आने से इनको एक राह मिले ,
इनके पँखों को नई गति मिले ,
वो सब एहसास मोहब्बत के ,
दिल ही दिल में फिर और खिलें |

हर मुलाकात बन जाये कहानी ,
शब्दों में भर जाये नई जवानी ,
मैं जितना कम तब लिखना चाहूँ ,
ये उतनी ज्यादा दूर तक साथ चलें |

ये कभी तेरी हँसी को बघारें ,
तो कभी मेरी हया को निहारें ,
कभी हम दोनो के किस्सों को ,
सर ~ए ~आम बाजार लिखें |

तुम मिलते रहा करो मुझसे अक्सर ,
मेरे शब्दों को देते रहा करो खबर ,
मेरा रोम - रोम मरने लगता है ,
इन शब्दों को बिन लिखे दिलबर |

मेरे शब्दों को हवा लग जाती है ,
देख तेरे आने से सनम ,
ये इतने बेजार हो गये थे कि ,
लिखते हुए भी इनका निकलता था दम ||







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