STORYMIRROR

Bharat Paswan

Tragedy Others

3  

Bharat Paswan

Tragedy Others

मेरे प्यार को समझ नहीं पाई...

मेरे प्यार को समझ नहीं पाई...

1 min
145

तू चाहकर भी मेरे प्यार को समझ नहीं पाई...

अकेला तन्हा ही ठीक था मैं,

क्यूं तू मेरी जिंदगी में आयी... 


एक अजनबी को दिल से लगाया..

फिर कहती हो मैं अब हो गई हूं पराई...


इस प्यार से अच्छी है तेरी जुदाई..

तू चाहकर भी मेरे प्यार को समझ नहीं पाई...


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy