STORYMIRROR

Bharat Paswan

Romance Tragedy

4  

Bharat Paswan

Romance Tragedy

मैं मजबूर हो गया ...

मैं मजबूर हो गया ...

1 min
329

तुझसे दूर होकर मैं मजबूर हो गया

किस्मत का रूठना अब दस्तूर हो गया, 


क्या कसूर दू इस किस्मत को

अपनी आदतों से ही मैं तुझसे दूर हो गया, 


अब तुम्हें देखना तो दूर

तेरी एक आवाज सुनने को मजबूर हो गया, 


अब भी जिन्दा है इस दिल में तेरी चाहत

तुझे याद करके ही एक पल के लिये ही सही, 

फिर से मैं खुशहाल हो गया। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance