STORYMIRROR

Kiran Bala

Abstract

3  

Kiran Bala

Abstract

मेरे जीवन साथी

मेरे जीवन साथी

1 min
497

मेरे जीवन साथी

चल चलें नए सफर की ओर

थाम स्वर्णिम स्वप्न की डोर

जब समक्ष उम्मीद की भोर

चलते चलें मंजिल की ओर


मेरे जीवन साथी

अधूरे तुम बिन सपनें सनम

लगे सूना सा जग - जीवन

हो संग तो गुनगुनाएंँ पवन

तुमसे ही ये जीवन नवरंग


मेरे जीवन साथी

मै दिल तो तुम हो धड़कन

मैं पुष्प तो तुम हो उपवन

मैं रूप तो तुम हो चितवन

मैं लाज तो तुम हो चिलमन


मेरे जीवन साथी

चल चलें शीर्ष की ओर

चाहे चलें हवाएँ पुरजोर

घिरे घटाएं चाहे घनघोर

चलते चलें खुशियों की ओर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract