STORYMIRROR

Arvina Ghalot

Abstract

3  

Arvina Ghalot

Abstract

मेरा घर याद आता है

मेरा घर याद आता है

1 min
456

घास फूस के तिनकों से बना

मेरा घर मुझे बहुत याद आता है


गाँव का पनघट रहट याद आता है

वो आले तिखाले वो ढिबरी का जलना


गाँव की गलियां चौपाल पर बैठना

याद आता है चौपायों का

गोधुलि में लौटना चुल्हे का जलना


सरसों का साग मक्का की रोटी याद आता है

रातों में अलाव पर बैठ कर कहानी का सुनना


वो शहर को जाती पगडंडी पर मीत का मिलना

आम का बगीचा नीम का पेड़ वो झूला याद आता है


घास फूस के तिनकों से बना

मेरा घर मुझे याद आता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract