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ARVIND KUMAR SINGH

Abstract Tragedy

4.6  

ARVIND KUMAR SINGH

Abstract Tragedy

मेरा भाई

मेरा भाई

1 min
48


कब से था इंतजार मुझे

दौड़ के घर को आएगा

रक्षाबंधन ये आया कैसा

शहीद हो गया मेरा भाई


अपनी रक्षा मांगूं किससे

किसके कांधे पर रोउंगी

कैसे अपने मन की करुं

जब रहा नहीं मेरा भाई


देश उसे था सबसे प्यारा 

जान न्यौछावर कर बैठा

कलाई उसके साथ नहीं 

तिरंगे में आया मेरा भाई


रखुंगी अपने पास हमेशा

कभी न कहीं जाने दुंगी 

मुझको तो हर हाल चाहिए

कैसे भी ला दो मेरा भाई


हो रे लोगों सुन लो मेरी

बस एक बार इसे जगा दो

उठकर गले लग जाये मेरे

कुछ कहने को मेरा भाई।


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