STORYMIRROR

मध्यस्थ

मध्यस्थ

1 min
282


अजीब कश्मकश है ज़िन्दगी की

रिश्ता है भी

और नहीं भी

बात होती भी है

और नहीं भी

हाल पूछे जाते हैं

और नहीं भी

बधाइयाँ भी दी जाती हैं

और नहीं भी


उत्सव त्योहार भी मनते हैं

कभी- कभी न्योते भी आते हैं

उपहार भी दिए जाते हैं

कुछ अजनबियों जैसी

भागीदारी भी होती है

हम किसी के कुछ

हैं भी और नहीं भी

जो भी है

बस मध्यस्थ है

वे ही तटस्थ है



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational