मधुबन, मधुबन, राधा
मधुबन, मधुबन, राधा
मधुबन, मधुबन राधा..
प्रियतम, प्रियतम श्याम आधा
हैं सुमन मेरी राधा, मैं मिलने को हूँ आधा,
मधुबन, मधुबन राधा
प्रियतम, प्रियतम श्याम आधा
जब-जब श्याम बुलाए, राधा दौड़ी आए
वो पल हो ऐसा, जब हम मिल जाए
तरसे बहुत हैं, ये नैयना हमारे,
अँखियों में इतना इंतजार हैं,
अब भी अँखियों में हमारे इतना प्यार हैं,
मिलने, मिलने आई राधा
वो मिलने चाहे श्याम राधा,
इंतजार ऐसा सफल हुआ,
श्याम नजर आ गया राधा पिया,
राधा श्याम देखे, श्याम राधा देखे,
वो ऐसा जब जो प्रेम हुआ,
सदियों की चाहत पूरी हुई हैं,
जो दिल ने चाहा, वो हो गई हैं
दिल की ये राहत पूरी हुई हैं,
वक्त ये ऐसा अब आ गया हैं,
एक-दूसरे बिन अधूरे रहे वो,
नैयनों में प्रेम सजाए,
दिल की हर बात बताए,
कोई भी समझ ना पाए,
क्या होता चला जाएं,
समझो, समझो मेरे रसिया,
ये बात समझाने की नहीं हैं,
सुन लो मेरे मन की भी पिया,
कुछ बात बिन कहे ही सही हैं,
राधा कहें अब श्याम से ऐसा,
जैसा सुनना चाहे श्याम, वो जैसा
तेरी बनसी मुझे बुलाए, तेरी चाहत मुझे पुकारे
मैं दौड़ी चली आऊं,
उस पल, तेरे दिल की नदिया किनारे
ऐ मेरे मोहन, श्याम बनवारी,
ऐ मेरे मधुबन, मेरे गिरधारी
मुझमें रहे तू हर पल ऐसे,
जैसे सुमन में खुशबू रहती हैं,
जैसे इस तन में सांसें बहती हैं,
सुनकर ऐसा श्याम मुस्कुराएँ,
देखें राधा, राधा और हरषाए
ऐसा मिलन हो कहीं किसी का,
वही बस सच्चा प्रेम कहलाए राधा आए,
जब-जब श्याम हरषाए,
राधा शर्माए, वो बस रास रचाए,
राधा संग ऐसे, तन-मन उसके,
तन-मन वही समाए,
हाँ, ऐसी प्रीति हैं ये हमारी,
जन्मों-जन्म तक न छोड़े जाए
जन्मों-जन्म तक बहती, रहती चली जाएं,
मधुबन, मधुबन राधा
प्रियतम, प्रियतम श्याम आधा
हैं सुमन मेरी राधा, मैं मिलने को हूँ आधा
मधुबन, मधुबन राधा.......

