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Atam prakash Kumar

Abstract

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Atam prakash Kumar

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मौत से आंँखें मिलाना चाहता हूं

मौत से आंँखें मिलाना चाहता हूं

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मौत से आंँखें मिलाना चाहता हूं।

डर ज़माने का मिटाना चाहता हूं।

रोज़ ही मर्दानगी के काम करके ,

मर्द हूंँ सब को बताना चाहता हूं।

काम दुनिया के सभी करते हुए मैं,

इश से भी लौ लगाना चाहता हूं ।

पेट में रोटी नहीं, तन अर्ध नंगा,

मस्तियाँ फिर भी लुटाना चाहता हूं।

भ्रष्ट नेता, भ्रष्ट अफ़सर, भ्रष्ट जनता,

रास्ता सबको दिखाना चाहता हूं ।

कान से बहरे हुए कानून को मैं,

दास्तां अपनी सुनाना चाहता हूं।

आज पंडित, मौलवी, नेता सभी के,

राज़ से पर्दा उठाना चाहता हूं ।

है भले मुझको रुलाया इस जहां ने,

मैं ज़माने को हंँसाना चाहता हूं ।

तुम पकड़ना चाहते हो मछलियांँ पर,

मैं तुम्हें मोती दिलाना चाहता हूं। 



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